मुझे कुछ दिनों पहले एक पेपर का टुकड़ा मिला था जिसपर एक लेख छपा था ।
उसका शीर्षक था
जीवन एक प्रतिध्वनि है
और उसके नीचे लिखा था
पिछले दिनों वाट्सअप पर एक मैसेज आया 'अगर सोन पापड़ी का गिफ्ट नही चाहते तो किसी को सोन पापड़ी मत देना।' पहली नजर मे इस सन्देश पर हसी आई। सभी के अनुभव की बात है। कुछ गिफ्ट ऐसे होते है जो सिर्फ बाटने के लिए बनाये जाते है। हर कोई एक दूसरे को देता रहता है। और चूँकि दुनिया गोल है इसलिये आपका डिब्बा घूम फिरकर आपके पास आ जाता है। वैसे जिसने भी सोन पापड़ी ईजाद की होगी वह समझदार हलवाई था। उसने एक ऐसी मिठाई खोजी जो लोगो की मानसिकता के माकूल है सस्ती और अच्छी दिखने मे सुंदर लम्बे समय तक युवा रहने वाली। लेकिन सोन पापड़ी के बहाने एक और गहरा सत्य सामने आया और वह यह की जीवन एक प्रतिध्वनि है। आप जो देते है वही आपको मिलता है। अगर अच्छे काम किये है तो उसका परिणाम देर सबेर अच्छे ही होंगे। अगर हमेशा दुसरो का बुरा ही चाहा है और बुराई के बीज बोये है तो उसके फल आपको ही चखने होंगे। हा बीज बोने और फल उगने मे समय का अंतराल बहुत हो सकता है। हम भूल जाते है की हमने ही ये काम किया है। मन की गहराई मे क्या क्या भाव दुर्भाव पड़े है इसकी खबर हमे ही नही होती।
आगे पेपर फटा हुआ था पर बात समझने के लिए काफी थी
इस लेख मे जो बाते लिखी गयी थी वह जीवन का एक कड़वा सत्य है। वह कहावत आपने सुनी ही होगी 'बोया पेड़ बबूल का तो आम ख से खाय' एक और कहावत भी है 'जैसे को तैसा मिले मिले नीच को नीच'
ये सब बाते मेरे लिए बहुत मायने रखती है या रखती थी क्योकि मेरे साथ कुछ ऐसी घटना घटी ।
मेरे दोस्त मेरे लिए खास होते है उन्हें मैं अपने परिवार का हिस्सा मानता हु।
इन्ही दोस्तो मे से एक दोस्त जो कुछ गलत रास्ते और गलत दोस्तो के साथ रहता था जब मैं उसे समझाता तो वह मुझे गलत कहता रोज रोज के इस लफ़ड़े से तंग आकर उसने मुझसे मिलना छोड़ दिया हमारे बीच सब कुछ खत्म हो गया। लेकिन 3 साल बाद वह लौट आया वह मेरे ऊपर उसे बहुत भरोसा करता है वह हर समय मेरे लिए तैयार रहता है।
कुछ और भी दोस्त है जिनके साथ मैं हमेशा सुख दुख मे खड़ा रहा बिना किसी स्वार्थ के पर उन्होंने मुझे धोखा दिया मेरा साथ छोड़ दिया
पर इन सब के बावजूद मुझे उम्मीद है की अगर मैंने उनके साथ गलत नही किया है तो उसका फल मुझे देर सबेर जरूर मिलेगा।
क्योकि सत्य परेशान हो सकता है
पर पराजित नही
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें